ॐ (ब्रह्मनाद) का महत्व
क्या कुछ विशेष शब्दों का कुछ विशेष तरीकों से उच्चारण करने पर आपके मानसिक और शारीरिक कष्टों को दूर भगाया जा सकता है? क्या आपके जीवन के तनाव को केवल आपके मुँह से निकले कुछ शब्द दूर कर सकते है? क्या आपकी मानसिक क्षमता को केवल साँस लेने और छोड़ने से बढ़ाया जा सकता है? क्या आप इन सब बातो पर यकीन करतें हैं? यदि नहीं तो निश्चित रूप से आप कुछ अनदेखा कर रहें है|
हिन्दू सभ्यता की विश्व को अनुपम देनों मे से एक है मंत्र| मंत्र कुछ शक्तिशाली शब्दों या वाक्यांशों को कहते है, जिनका उनके शाब्दिक अर्थों मे अर्थ हो भी सकता है और नहीं भी| दूसरे आध्यात्मिक परम्पराओ मे इसे spells (A verbal formula believed to have magical force), incantations (A ritual recitation of words or sounds believed to have a magical effect) और प्रार्थना की विधियाँ भी कह सकते है| संस्कृत शब्द ‘मंत्र‘ वस्तुतः दो शब्दों मानस (मष्तिष्क – mind) और त्रम ( रक्षा – protection) का योग है, अतः इसका शाब्दिक अर्थ हुआ- मष्तिष्क की रक्षा |
भारतीय पराभौतिकीय परम्परा मे यह बताया जाता है कि हमारा शरीर पंच महाभूतों से बना है, जो कि पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल, और आकाश हैं| ये हमे पाँच इन्द्रिय गुण प्रदान करते हैं – शब्द (sound), स्पर्श (touch), रुप (form or seeing), रस (taste), और गंध (smell)| यहाँ हम बात कर रहें इस प्रथम गुण शब्द (sound) की|
किसी भी शब्द का उच्चारण कुछ भौतिक कंपन पैदा करता है| यदि हम उस कंपन के प्रभावो का अध्ययन करे तो प्रत्येक शब्द का सही अर्थ जान सकते है| मंत्र वस्तुतः उर्जायुक्त ध्वनियां है जो कि सही तरीके से उच्चारण करने पर बहुत प्रभाव पैदा करती है| जब यह ध्वनि प्रभाव मष्तिष्क और वातावरण मे पहुँचता है तो यह मंत्र बहुत ही शक्तिशाली प्रतीत होते है| ठीक उसी प्रकार जब अनुनाद (resonance) की अवस्था मे सामान्य ध्वनि भी बहुत बड़ा कंपन पैदा करती है|
वेदो मे जिन मंत्रो के बारे मे लिखा है, उनमे सबसे सरल, सबसे प्रभावशाली, सबसे गूढ़ और सबसे छोटा मंत्र है- ॐ| सर्वाधिक पवित्र और धार्मिक शब्द ॐ को ही मानते है| यह ईश्वर की एक स्तुति है, ईश्वर का एक आशीर्वाद है, एक प्रतिज्ञा है| जब यह मंत्र किसी उद्देश्य से उच्चारित किया जाना हो तो कोई भी अन्य व्यक्ति आसपास नहीं होना चाहिये| यह सभी मंत्रो के आरम्भ मे लगाया जाता है|
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ॐ शब्द तीन अक्षरो से मिलकर बना है- अ, उ, और म| ऐसा माना जाता है कि यह तीन अक्षर तीन प्रमुख वेदो को निरूपित करते है| यह तीन महाभूतो को भी निरूपित करते है- अ (अग्नि), उ (वरुण – जल), म (मारूत – वायु)|
सभी उपनिषदो इस मंत्र का वर्णन मिलता है| गीता मे भी इसकी महत्ता बतायी गयी है|इसे केवल हिन्दुओं मे ही नहीं बल्कि सिखों, जैनों और बौद्धों मे समान रूप से सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है| भारत के बाहर चीन और तिब्बत मे भी यह प्रचलित है| चीनी मे 唵 और तिब्बती में ༀ लिखते है| संस्कृत मे इसे प्रणव अथवा ओंकार भी कहते है|
ॐ का वैज्ञानिक महत्व
मंत्र मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है- शाब्दिक, सांकेतिक, और भावनात्मक| शाब्दिक मंत्र का अर्थ स्पष्ट होता है, सांकेतिक मंत्रो मे शब्दो का अर्थ कुछ अन्य संकेत होते है, जबकि भावनात्मक मंत्रो मे भाषा से परे, ध्वनियो का अर्थ होता है| ॐ एक भावनात्मक मंत्र है|
ॐ मे 3 1/2 मात्रायें होती है- अ+उ+म+(शान्ति=1/2)
अ - मैं समझता हूँ| - (विचार)
उ - मै विस्मृत कर गया| - (इन्द्रिय बोध)
उ+अ - मुझे स्मरण है| - (विचार+बोध)
म - मै आनन्द मे हूँ| - (आत्मबोध)
(शान्ति) - मै हूँ| - (ब्रह्माण्ड बोध- ब्रह्मज्ञान)
जब आप ॐ का उच्चारण करते है तो ‘अ’ कंठ से निकलती है, ‘उ’ जिह्वा से होकर गुजरती है, और ‘म्’ होठो पर समाप्त हो जाती है| ‘अ’ से जागृति , ‘उ’ से स्वप्न, ‘म्’ से निद्रा का प्रभाव मिलता है| यह मनुष्य के कंठ से निकलने वाले सभी ध्वनियो को निरूपित करता है अतः इसे “ब्रह्मनाद” भी कहते है| शरीर, ध्वनि और मष्तिष्क की एकता को निरूपित करता है ॐ |
वेद शास्त्रों में तो ॐ के कई चमत्कारिक प्रभावों का उल्लेख मिलता ही है, आज के आधुनिक युग में वैज्ञानिकों ने भी शोध के मध्यम से ॐ के चमत्कारिक प्रभाव की पुष्टी की है| ॐ का जाप अलग अलग आवृत्तियों और ध्वनियों में दिल और दिमाग के रोगियों के लिए बेहद असर कारक है| यहाँ एक बात बेहद गौर करने लायक यह है कि जब कोई मनुष्य ॐ का जाप करता है तो यह ध्वनि जिह्वा से न निकलकर पेट से निकलती है| यही नही ॐ का उच्चारण पेट, सीने और मस्तिस्क में कम्पन पैदा करता है| यह कम्पन शरीर की मृत कोशिकाओं को पुनर्जीवित कर देता है तथा नई कोशिकाओं का निर्माण करता है| शोध में यह भी पाया गया कि ॐ का जाप मस्तिष्क से लेकर नाक, गला फेफडे के हिस्सों में तेज़ तरंगे प्रवाहित करता है| यही नही आयुर्वेद में भी ॐ के जाप के चमत्कारिक प्रभावों का वर्णन है|
ॐ हिंदू धर्म का प्रतीक चिन्ह ही नहीं बल्कि हिंदू परम्परा का सबसे पवित्र शब्द है| प्रतिदिन ॐ का उच्चारण न सिर्फ़ ऊर्जा शक्ति का संचार करता है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाकर कई असाध्य बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है|
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भारतीय वेदिक विग्यान के उदाहरण का बहुत सुन्दर वर्णन .
Nice!! Thoughtful and knowledge
बहुत बढिया पोस्ट्!
पढ़ कर हिन्दू संस्कृति पर गर्व हुआ . बधाई .
विवेचना अच्छी लगी ,रोचक ढंग से चर्चा की गयी ,बधाई |
शब्द की महत्ता इसी से समझी जा सकती है की ,पूरी की पूरी संस्कृत व्याकरण की रचना शिव जी के डमरुओं के बोलों से हुई है, और यह जग प्रसिद्ध है|
बहुत बढिया पोस्ट्!
ब्रह्मनाद के महत्व को बहुत अच्छे से आपने समझाने का प्रयास किया। विश्व की लगभग प्रत्येक सभ्यता, संस्कृ्ति ने भिन्न भिन्न रुपों में इसके महत्व को स्वीकार किया है।