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मेण्डलीव की आवर्त सारणी में संस्कृत

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यदि आप कभी विज्ञान के छात्र रहे है तो रासायनिक तत्वो की आवर्त सारणी के बारे मे अवश्य जानते होंगे| लेकिन क्या आप यह जानते है कि इसके रचयिता मेण्डलीव ने इसमे तत्वो के लिये संस्कृत शब्दो का प्रयोग किया है? है ना आश्चर्यजनक!

Medeleeff_by_repinपहले इस बात पर चर्चा करते है कि रासायनिक तत्वो की आवर्त सारणी है क्या? आवर्त सारणी अथवा तत्वों की आवर्त सारणी रासायनिक तत्वों को उनकी संगत विशेषताओं के साथ एक सारणी के रूप में दर्शाने की एक व्यवस्था है। वर्तमान आवर्त सारणी मै 117 ज्ञात तत्व सम्मिलित हैं। रूसी रसायन-शास्त्री मेंडलीफ (सही उच्चारण- मेन्देलेयेव) ने सन 1869 में आवर्त नियम प्रस्तुत किया। इसके अनुसार तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणुभारों के आवर्तफलन होते हैं। अर्थात यदि तत्वों को परमाणु भार के वृद्धिक्रम में रखा जाय तो वो तत्व जिनके गुण समान होते हैं एक निश्चित अवधि के बाद आते हैं। मेंडलीव ने इस सारणी के सहारे तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आवर्ती होने के पहलू को प्रदर्शित करने का प्रयत्न किया। 1815 से 1913 तक इसमें बहुत से सुधार हुए ताकि नये आविष्कृत तत्वों को उचित स्थान दिया जा सके और सारणी नयी जानकारियों के अनुरूप हो। रसायन शास्त्रियों के लिये आवर्त सारणी अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं उपयोगी है। इसके कारण कम तत्वों के गुणधर्मों को ही याद रखने से काम चल जाता है क्योंकि आवर्त सारणी में किसी समूह (उर्ध्वाधर पंक्ति) या किसी आवर्त (क्षैतिज पंक्ति) में गुणधर्म एक निश्चित क्रम से एवं तर्कसम्मत तरीके से बदलते हैं।

तत्वों के परमाणु भार के वृद्धि क्रम में क्रमबद्ध करने पर क्षैतिज कतारें प्राप्त होती हैं जिन्हें आवर्त कहते हैं। आवर्त नियम के अनुसार तत्वों को परमाणु भार के वृद्धि क्रम में क्षैतिज कतारों में सजाने पर सामन गुण वाले तत्व एक ही उर्ध्वाधर कालम में उपस्थित रहते हैं। इन्हें उर्ध्वाधर कालम के वर्ग कहते हैं। मैंडलीफ की आवर्त सारणी में कुल 8 वर्ग थे क्योंकि उस समय निष्क्रिय गैसों की खोज नहीं हुई थी। बाद में निष्क्रिय गैसों की खोज के पश्चात आधुनिक आवर्त सारणी में 9वें वर्ग को सामिल किया गया। इस 9वें वर्ग को 0 (शून्य वर्ग) कहते हैं। वर्ग एक से आठवें वर्ग को रोमन अक्षर I, II, III, IV, V, VI, VII तथा VIII द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। नवें वर्ग को 0 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसके विकास के अंतिम चरण में राग, वर्नर, बोहर और बरी आदि वैज्ञानिकों ने आवर्त सारणी का आधुनिकतम रूप बनाया जो वर्तमान तक चलन में है। इन्होंने मेंडेलिव की आवर्त सारणी में उपस्थित श्रेणियों को खत्म किया तथा वर्गो की संख्या को 9 से बढ़ाकर 18 किया। इसके बाद भी हाइड्रोजन का दो स्थानों पर होना और लेंथेनाइड और एक्टीनाइड तत्वों को सारणी में स्थान न होना दो मुख्य दोष अब तक हैं।

आइये देखते है मेण्डलीव द्वारा 1872 मे प्रस्तुत आवर्त सारणी को|
mendeleev's 2nd table

इस आवर्त सारणी मे कुछ स्थान खाली है| वस्तुतः ये स्थान नये तत्वो की भविष्यवाणी करते है| जैसे – गैलियम (gallium) और जर्मेनियम (germanium)| इन तत्वो की भविष्यवाणी मेण्डलीव ने 1869 मे की थी और 1875 और 1886 मे इन तत्वों की खोज की गयी| इन संभावित तत्वो को मेण्डलीव ने उनके उपर लिखे तत्वो के अनुसार नाम दिया| जैसे ग्रुप-3 मे बोरान के नीचे, संभावित तत्व को एक-बोरान (eka-boron), एलुमिनियम के नीचे संभावित तत्व को एक-एलुमिनियम (eka-alluminium) इत्यादि| मेण्डलीव ने कुल 8 तत्वो के लिये संस्कृत शब्दो का प्रयोग किया था|

Eka-aluminium (एक-एलुमिनियमम)  -  Gallium
Eka-boron(एक-बोरोन)  -  Scandium
Eka-silicon(एक-सिलिकान)  -  Germanium
Eka-manganese(एक-मैंगनीज)  -  Technetium
Tri-manganese(त्रि-मैंगनीज)  -  Rhenium
Dvi-tellurium(द्वि-टेल्लुरियम)  -  Polonium
Dvi-caesium(द्वि-कैस्मियम)  -  Francium
Eka-tantalum(एक-टेन्टेलम)  -  Pratactinium

केवल इतना ही नही, आवर्त सारणी कई दृष्टिकोणो से देवनागरी वर्णमाला से भी मिलती जुलती है| देवनागरी वर्णमाला नीचे दी गयी|

अ आ इ ई उ ऊ         a ā i ī u ū
ऋ ॠ ऌ ॡ             ŗi ŗī lŗi lŗī
ए ऐ ओ औ अं अ:      e ai o au am ah

क ख ग घ ङ           k kh g gh ṅ
च छ ज झ ञ           c ch j jh ñ
ट ठ ड ढ ण            ṭ ṭh ḍ ḍh ṇ
त थ द ध न           t th d dh n
प फ ब भ म           p ph b bh m
य र ल व              y  r  l   v
श ष स ह              ś  ş  s  h

सोलह वर्णो का प्रथम समूह “स्वर” कहलाता है, और बाकी के अक्षर “व्यंजन”| सभी स्वर कंठ से निकलते है| व्यंजनो को पुनः पाँच समूहो मे बाँटा गया है|

इस प्रकार देवनागरी वर्णमाला द्वि-आयामी व्यवस्था है, जिसमे प्रत्येक अक्षर अपने क्षैतिज समूह के अन्य अक्षरो के समान है, साथ ही साथ वह उर्ध्व रेखा मे, अन्य समूहो के अक्षरो के समान गुण प्रदर्शित करता है| जैसे ‘क’ के साथ ‘ह’ का उच्चारण करने पर वह ‘ख’ बनता है, और ‘च’ को ‘ह’ से मिलाने पर ‘छ’ बनता है, तथा वर्णमाला मे ‘ख’ और ‘छ’ ऊपर-नीचे है| ध्यान देने योग्य बात है कि संसार की अन्य वर्णमालाये रैखिक है, जैसे रोमन (A, B, ….Z)|

मेण्डलीफ की आवर्त सारणी भी द्वि-आयामी है| इसमे क्षैतिज समूह और उर्ध्व समूह दोनो है|

तो क्या मेण्डलीव को संस्कृत का ज्ञान था? यदि हाँ तो क्या इस भाषा के लिये इतना सम्मान था कि अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि मे भी इसे प्रदर्शित कर दिया?

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) के प्रोफेसर पॉल किपास्की (Paul Kiparsky) के अनुसार, मेण्डलीव एक संस्कृतविद बौदलिंक (Böhtlingk) के साथी एवं मित्र थे, जो कि उस समय पाणिनि पर अपनी पुस्तक (Otto Böhtlingk, Panini’s Grammatik: Herausgegeben, Ubersetzt, Erlautert und MIT Verschiedenen Indices Versehe. St. Petersburg, 1839-40) लिख रहे थे, और मेण्डलीफ ने पाणिनि को सम्मान देने की इच्छा से ही संभावित तत्वो को ऐसे नाम दिये|

पॉल किपास्की आगे मेण्डलीफ की सारणी और देवनागरी वर्णमाला मे समानता की भी बाते करते है| उनके शब्दो मे-

” [T]he analogies between the two systems are striking.  Just as Panini found that the phonological patterning of sounds in the language is a function of their articulatory properties, so Mendeleev found that the chemical properties of elements are a function of their atomic weights.  Like Panini, Mendeleev arrived at his discovery through a search for the “grammar” of the elements (using what he called the principle of isomorphism, and looking for general formulas to generate the possible chemical compounds).  Just as Panini arranged the sounds in order of increasing phonetic complexity (e.g. with the simple stops k,p… preceding the other stops, and representing all of them in expressions like kU, pU) so Mendeleev arranged the elements in order of increasing atomic weights, and called the first row (oxygen, nitrogen, carbon etc.)  “typical (or representative) elements”.  Just as Panini broke the phonetic parallelism of sounds when the simplicity of the system required it, e.g. putting the velar to the right of the labial in the nasal row, so Mendeleev gave priority to isomorphism over atomic weights when they conflicted, e.g. putting beryllium in the magnesium family because it patterns with it even though by atomic weight it seemed to belong with nitrogen and phosphorus.  In both cases, the periodicities they discovered would later be explained by a theory of the internal structure of the elements.”

किपास्की का यह भी कहना है कि सम्भवत: पाणिनि के “शिव-सूत्र” से प्रभावित हो कर तत्वो की दो-आयामी व्यवस्था का विचार उनके मन मे आया| हालांकि इस बात के संकेत नही है कि उन्हे संस्कृत भाषा का गहरा ज्ञान था| निश्चित रूप से यह केवल संस्कृत वर्णमाला के सारणिक रूप का प्रभाव था, क्योकि यह तो किसी भी नये विद्यार्थी को भी मालूम रहता है| संस्कृत वर्णमाला के सारणिक रूप के दो कारण है- कंठ और श्वास का प्रयोग, और मेण्डलीव ने इस बात को ध्यान दिया होगा कि रासायनिक बन्ध और परमाणु भार के आधार पर तत्वो की दो-आयामी सारणी बनायी जा सकती है|

इस सिद्धान्त को ध्यान मे रखकर सारणी बनाते समय, जो स्थान खाली रह गये, मेण्डलीव के अनुसार, उस पर निश्चित रूप से कोइ तत्व होना चहिये, जो कि उस समय खोजा नही गया था| इस प्रकार उन्होने 8 नये तत्वो की भविष्यवाणी की, और उनके नामो के लिये ‘एक’,'द्वि’, और ‘त्रि’ प्रत्यय का प्रयोग किया|

उल्लेखनीय है कि उन्नीसवीं शताब्दी के बहुत से यूरोपीय विद्वानो ने संस्कृत का अध्ययन किया था| बौदलिंक (Böhtlingk) भी उनमे से एक थे और मेण्डलीव के मित्र भी थे| मेण्डलीव St. Petersburg Academy of Sciences मे लेक्चर देते थे जब उन्हे उनकी पुस्तक “Organic Chemistry” के लिये Demidov prize दिया गया| बौदलिंक (Böhtlingk) उस पुरस्कार के नामांकन समिति के सदस्य थे|

सन्दर्भ-
Mendeleev and the Periodic Table of Elements by Subhash  Kak

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10 Responses to “मेण्डलीव की आवर्त सारणी में संस्कृत”

  1. R.K.Sharma says:

    ज्ञानवर्धक रोचक आभार ।

  2. drshyamgupta says:

    bahut rochak khoj.paaninee ne sahity,ganit va jyotish ke antarsambandh sthaapit kiye the.vigyaan ka mool ganit men hee hai.—bahut sundar, badhaaee.

  3. R.K.Sharma says:

    रोचक और ज्ञानवर्धक कुछ नयी जानकारियां प्राप्त हुई हैं।

  4. Ravi Prakahji ,You are doing exlempary work .conserve and cover entire spectrum of physical sciences to find things of indian origins.
    Thanks for preserving the precious beeds .
    virendra sharma (veerubhai1947.blogspot.com)

  5. धन्यवाद.

  6. हम तो कभी सोच भी नहीं सोच सकते थे आवर्त सारणी से देवनागरी का इतना साम्य । खूबसूरत ज्ञानवर्धक पोस्ट । आभार ।

  7. बेहद ज्ञानवर्धक पोस्ट….
    देखा जाए तो इस देश नें दुनिया को इतना ज्ञान दिया है कि सम्पूर्ण विश्व उस ऋण से कभी उऋणी नहीं हो सकता……

  8. SriPrakash says:

    Interesting!

  9. रोचक और ज्ञानवर्धक! धन्यवाद.

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