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हार्दिक स्वागत है आपका चर्चा मंच पर। यह मंच समर्पित है भारत चर्चा को। भारत से सम्बन्धित किसी भी विषय पर आपके विचार चर्चा के लिये आमन्त्रित हैं। भारत विश्व की सर्वाधिक धनी और प्राचीन सभ्यता का स्थान है, जिसका अस्तित्व सदियो तक रहा है, तथा जिसके प्रमाण हमे आज भी मिलते हैं। प्राचीन भारत को विश्व ज्ञान गुरु कहा जाता है। गणित और विज्ञान की कई विधाओं की जन्म-स्थली है यह भूमि। इस मंच पर आप भारत के स्वर्णिम इतिहास के बारे मे अपने विचार रख सकते हैं। भारत तो अनगिनत विविधताओ से भरा देश है। इसे पूर्णतः जानना तो असंभव प्रतीत होता है, परन्तु एक प्रयास तो हम कर ही सकते हैं। हमारे इस प्रयास मे अपना योगदान दीजिए।

आर्यभट्ट का खगोल ज्ञान

“आर्यभट्ट ने अंतरिक्ष मे ग्रहो की स्थिति का एक व्यवस्थित तरीका दिया। उन्होने पृथ्वी की परिधि 4967 योजन और व्यास 1581 1/24 योजन बताया। चूंकि 1 योजन = 5 मील, अतः इस प्रकार परिधि 24835 मील हुयी, जो कि वर्तमान मे स्वीकार्य मान 24902 मील के बहुत निकट है। उनका विश्वास था कि स्वर्ग (आकाश/अंतरिक्ष) की आभासी गति पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के कारण होती...

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शुल्व सूत्र – गणित के अर्वाचीन सूत्र

शुल्व सूत्र हिंदू धार्मिक दस्तावेज़ों का एक संग्रह है, जिसे 800 BCE के बीच 200 BCE लिखा गया। यह पुस्तके गणितीय रुप से बहुत महत्वपूर्ण हैं। कई विद्वानों का विश्वास है कि ये गणित की सबसे पुरानी पुस्तके हैं। इन पुस्तको मे बहुत से गणितीय सिद्धांत है जो कि हमे बताते है कि प्राचीन भारत में गणित अन्य प्राचीन संस्कृति से भी ज़्यादा अग्रिम था।...

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क्यों श्रेष्ठतम है संस्कृत?

संस्कृत भारत की एक शास्त्रीय भाषा है। यह दुनिया की सबसे पुरानी उल्लिखित भाषाओं में से एक है। संस्कृत को श्रेष्ठतम कहने के बहुत से कारण है, जैसे सर्वश्रेष्ठ व्याकरण, त्रुटिहीन व्याकरण, सरल एवं वैज्ञानिक, और प्राचीनता| यहाँ पर संस्कृत की कुछ विशेषताओ को बताना चाहता हूँ जो कि इसे एक विशिष्ट स्थान प्रदान करते है| संस्कृत हिन्द-यूरोपीय...

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आर्यभट्ट प्रथम-एक परिचय

“जब पंच सिद्धान्तो के परिणाम पुराने अवलोकनो के उलट परिणाम देने लगे, जैसे ग्रहों की कक्षा और ग्रहण इत्यादि, तो कलियुग मे, कुसुमपुर नामक स्थान मे, ज्योतिष मे प्रवीण, आर्यभट्ट के रूप मे सूर्य स्वयं अवतरित हुये।” - एक प्राचीन संस्कृत कथन। कितना तेजोमय और प्रबल वर्णन है यह आर्यभट्ट और खगोल विज्ञान मे उनके योगदान का! जब समस्त संसार...

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मेण्डलीव की आवर्त सारणी में संस्कृत

यदि आप कभी विज्ञान के छात्र रहे है तो रासायनिक तत्वो की आवर्त सारणी के बारे मे अवश्य जानते होंगे| लेकिन क्या आप यह जानते है कि इसके रचयिता मेण्डलीव ने इसमे तत्वो के लिये संस्कृत शब्दो का प्रयोग किया है? है ना आश्चर्यजनक! पहले इस बात पर चर्चा करते है कि रासायनिक तत्वो की आवर्त सारणी है क्या? आवर्त सारणी अथवा तत्वों की आवर्त सारणी...

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पाणिनि – व्याकरण के सर्वश्रेष्ठ रचनाकार

“मैं निर्भय कह सकता हूँ कि अंग्रेज़ी या लैटिन या ग्रीक में ऐसी संकल्पनाएँ नगण्य हैं जिन्हें संस्कृत धातुओं से व्युत्पन्न शब्दों से अभिव्यक्त न किया जा सके । इसके विपरीत मेरा विश्वास है कि 250,000 शब्द सम्मिलित माने जाने वाले अंग्रेज़ी शब्दकोश की सम्पूर्ण सम्पदा के स्पष्टीकरण हेतु वांछित धातुओं की संख्या, उचित सीमाओं में न्यूनीकृत...

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