हार्दिक स्वागत है आपका चर्चा मंच पर। यह मंच समर्पित है भारत चर्चा को।
भारत से सम्बन्धित किसी भी विषय पर आपके विचार चर्चा के लिये आमन्त्रित
हैं। भारत विश्व की सर्वाधिक धनी और प्राचीन सभ्यता का स्थान है, जिसका
अस्तित्व सदियो तक रहा है, तथा जिसके प्रमाण हमे आज भी मिलते हैं। प्राचीन
भारत को विश्व ज्ञान गुरु कहा जाता है। गणित और विज्ञान की कई विधाओं की
जन्म-स्थली है यह भूमि। इस मंच पर आप भारत के स्वर्णिम इतिहास के बारे मे
अपने विचार रख सकते हैं। भारत तो अनगिनत विविधताओ से भरा देश है। इसे
पूर्णतः जानना तो असंभव प्रतीत होता है, परन्तु एक प्रयास तो हम कर ही
सकते हैं। हमारे इस प्रयास मे अपना योगदान दीजिए।
August 10th, 2009 | Posted by रवि प्रकाश | 6 Comments »
इतिहास के तथ्यो को समझने के लिये वैज्ञानिक ज्ञान होना आवश्यक है| इससे ज्ञान आधारित समाज का निर्माण होता है और सर्वस्वीकार्य निष्कर्ष सामने आते है| विज्ञान चमत्कारो को नही मानता है| राम सेतु को भी विज्ञान से दूर केवल एक विश्वास के रूप मे देखने पर इसकी ऐतिहासिकता की व्याख्या ठीक से नही की जा सकती है| आईये देखे कि विज्ञान क्या कहता...
July 20th, 2009 | Posted by रवि प्रकाश | 5 Comments »
क्या कुछ विशेष शब्दों का कुछ विशेष तरीकों से उच्चारण करने पर आपके मानसिक और शारीरिक कष्टों को दूर भगाया जा सकता है? क्या आपके जीवन के तनाव को केवल आपके मुँह से निकले कुछ शब्द दूर कर सकते है? क्या आपकी मानसिक क्षमता को केवल साँस लेने और छोड़ने से बढ़ाया जा सकता है? क्या आप इन सब बातो पर यकीन करतें हैं? यदि नहीं तो निश्चित रूप से आप कुछ...
July 14th, 2009 | Posted by रवि प्रकाश | 8 Comments »
जैसा कि मैने पहले भी बताया है कि युग व्यवस्था बहुत ही भ्रामक है और अलग अलग विद्वानों ने इसकी व्याख्या अपने तरीके से की है| (पढ़ें- युग-युग की बातें (भारतीय युग सिद्धान्त))इस लेख का उद्देश्य भारतीय युग व्यवस्था पर एक सकारात्मक चर्चा कर उसकी प्रामाणिकता की खोज करनी है| मैं यहाँ पर अपनी कोई व्याख्या न देकर केवल उन विद्वानों की व्याख्या...
July 6th, 2009 | Posted by रवि प्रकाश | 5 Comments »
अयोध्या में 17 साल पहले बाबरी मस्जिद गिराने के लिए कौन जिम्मेदार है? लिब्राहम आयोग की जांच रिपोर्ट आने का इंतज़ार सभी को था और आखिरकार वह बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट आ ही गयी| 17 साल की लंबी कवायद, 8 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च और 48 बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद यह रिपोर्ट तैयार हुई है। संभवत: विश्व इतिहास में किसी आयोग के इतने लंबे...
June 29th, 2009 | Posted by रवि प्रकाश | 13 Comments »
In the Hindu texts, a year was taken to comprise 12 months (360 days). Multiply these two numbers to get 360×12=4320. Now, suffix this number with the requisite number of zeroes to produce long structured time-spans. One Mahayuga equals 4,320,000 years. A Kalpa, is defined as equal to 1000 Mahayugas. A Mahayuga, in turn, is composed of four ages or yugas. The other yugas are Satya or Krita-yuga, Treta-yuga, Dvapara-yuga and Kaliyuga. The smallest yuga is Kaliyuga, which is 1/10th of Mahayuga.
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But are they real counts? Are yugas really of such a long time period? Let see some ideas.
Traditional concept is miscalculated: Sri Yukteswar Giri
According to Sri Yukteswar Giri, guru of Paramahansa Yogananda, the traditional view is based on miscalculations made by astronomers and astrologers. In his book, The Holy Science, Sri Yukteswar proposes...
June 22nd, 2009 | Posted by रवि प्रकाश | 4 Comments »
“The ingenious method of expressing every possible number using a set of ten symbols (each symbol having a place value and an absolute value) emerged in India. The idea seems so simple nowadays that its significance and profound importance is no longer appreciated. It’s simplicity lies in the way it facilitated calculation and placed arithmetic foremost amongst useful inventions.”
– Laplace, French mathematician.
लाप्लास का यह कथन कितना तर्कसंगत लगता है जब हम वर्तमान वैज्ञानिक प्रगति को देखते हैं| गणित और विज्ञान के वर्तमान स्वरूप की कल्पना शून्य के बिना असंभव है| सत्य...