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कब सुलझेगा राम मन्दिर-बाबरी मस्जिद विवाद?

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अयोध्या में 17 साल पहले बाबरी मस्जिद गिराने के लिए कौन जिम्मेदार है? लिब्राहम आयोग की जांच रिपोर्ट आने का इंतज़ार सभी को था और आखिरकार वह बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट आ ही गयी| 17 साल की लंबी कवायद, 8 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च और 48 बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद यह रिपोर्ट तैयार हुई है। संभवत: विश्व इतिहास में किसी आयोग के इतने लंबे समय तक चलने की यह अनोखी दास्तान है। क्या है यह विवाद और क्यों है यह विवाद, एक नज़र मेरी भी तरफ से|

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1528 मे अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया जिसे कुछ हिंदू अपने आराध्य देवता राम का जन्म स्थान मानते हैं| समझा जाता है कि मुग़ल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी जिस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था| बाबरी मस्जिद, 16वीं सदी में भारत में पहले मुग़ल बादशाह बाबर के आदेश पर, अयोध्या, जो कि वर्तमान उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जिले मे स्थित है, मे बनवाया गया था| वाल्मीकि द्वारा रचित पुस्तक “रामायण” मे इसे त्रेतायुग श्रीराम के राज्य की राजधानी बताया गया है| ध्यान देने योग्य बात है कि श्रीराम को हिन्दू समाज मे भगवान का स्थान दिया गया है| 1940 ईसवीं से पहले इस मस्जिद को मस्ज़िद-ए-जन्मस्थान कहा जाता था| यह रामकोट (राम का किला) की पहाड़ियों पर एक प्राचीन मन्दिर के अवशेषो पर बनाया गया था| हालांकि उच्चतम न्यायालय ने मस्ज़िद को नुकसान न पहुँचाने का आदेश दिया था, लेकिन फिर भी 6 दिसम्बर 1992 को लगभग 150,000 हिन्दू राष्ट्रवादियों द्वारा इसे नष्ट कर दिया गया था|

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090630115039_ayodhyaland283हिन्दू मत के अनुसार 1527 ईसवीं मे फ़र्ग़ाना, मध्य एशिया से एक मुग़ल आक्रमणकारी बाबर भारत आया और सबसे पहले सीकरी के चित्तौड़गढ़ के हिन्दू राज्य पर अपना अधिकार कर लिया| तत्पश्चात उसने बलपूर्वक हिन्दू संख्या को कम करना आरम्भ कर दिया| उसने यह क्षेत्र अपने सिपहसालार मीर बक़ी को दिया| मीर बक़ी 1528 मे अयोध्या आया और उसने यहाँ के प्रमुख और सबसे बड़े मन्दिर पर विशेष ध्यान दिया, जो कि वहाँ बना हुआ था जहाँ प्राचीन भारत के सम्राट श्री राम का जन्म हुआ था| सम्राट श्रीराम को हिन्दुओ मे भगवान का दर्जा दिया गया है, और वह भगवान विष्णु के अवतार माने जाते है| मीर बक़ी ने कथित रूप से अयोध्या के इस मन्दिर को नष्ट किया और उसी स्थान पर एक मस्ज़िद का निर्माण किया| इसे उसने अपने राजा बाबर के नाम पर बाबरी मस्ज़िद कहा| मन्दिर को नष्ट करके उसी स्थान पर मस्ज़िद बनाने की बात को ब्रिटानिका एनसाइक्लोपेडिया मे भी बताया गया है| इस स्थान पर बनाया गया मस्ज़िद उत्तर प्रदेश के बड़े मस्ज़िदों मे से एक था| इसके प्रसिद्ध होने का एक कारण यह भी था कि इसका स्थान विवादित था|

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मुस्लिमों का कहना है कि इतिहास और तथ्य दोनो ही हिन्दुओ के दावे को सिद्ध करने के लिये अपर्याप्त है| यह सारे दावे , उनके अनुसार्, विश्व हिन्दु परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मनगढंत है|हालांकि बाबर की आत्मकथा बाबरनामा मे इस मस्ज़िद के निर्माणकाल का कोइ जिक्र नही है| मन्दिर के ध्वंस और मस्ज़िद के निर्माण को 1194 से 1528 के बीच माना जाता है| कुछ लोगों का यह भी कहना है कि वहाँ पर मस्ज़िद पहले से मौजूद था, बाबर के काल मे केवल उसका पुनर्निर्माण किया गया था| समकालीन तारीख्-ए-बाबरी मे लिखा है कि बाबर के सैनिकों “चन्दारी मे अनेक हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया|”

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हालांकि, इस तथ्य के बावजूद कि “रामायण” के अनुसार अयोध्या श्रीराम का जन्मस्थान और राजधानी था, कुछ गैर-मुख्यधारा के इतिहासकारो का यह मानना है कि यहाँ पर कोई मन्दिर नही था| प्रोफेसर राम शरण शर्मा अपनी पुस्तक Communal History and Rama’s Ayodhya मे लिखते हैं- “Ayodhya seems to have emerged as a place of religious pilgrimage in medieval times. Although chapter 85 of the Vishnu Smriti lists as many as fifty-two places of pilgrimage, including towns, lakes, rivers, mountains, etc., it does not include Ayodhya in this list.” शर्मा यह भी कहतें है कि तुलसीदास, जिन्होने अयोध्या पर 1547 मे “रामचरितमानस” लिखी थी, ने भी इसे धार्मिक तीर्थ नही बताया है| बाबरी विध्वंस के बाद प्रोफेसर राम शरण शर्मा ने कुछ अन्य इतिहासकारो सूरजभान, एम. अथर अली, और द्विजेन्द्र नारायण झा के साथ मिलकर Historian’s report to the nation प्रकाशित की जिसमे बताया है कि किस प्रकार सम्प्रदायिक तत्वो ने यह गलती की| अपने एक लेख मे प्रो शर्मा लिखते है “उत्तर प्रदेश के पुरातत्व विभाग के भूतपूर्व निदेशक, रामचंद्र सिंह ने अयोध्या में 17 स्थानों की खुदाई करवायी और ऋणमोचन घाट व गुप्तारघाट नाम के दो स्थलों का भी उत्खनन करवाया| उनके अनुसार वहां अधिकतर स्थानों पर ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से पहले आबादी होने के चिह्र नहीं मिलते|” हालांकि मुख्यधारा के इतिहासकार इस बात को मानते है कि वहाँ पर एक मन्दिर था| यह बात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से भी सिद्ध होती है, कि वह प्राचीन मन्दिर् लगभग एक हजार वर्ष पुराना था|

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जैन समुदाय भी, कुछ वर्षों  पूर्व, 2003  मे इस विवाद मे कूद पड़ा। जैनों के एक सामाजिक संस्था जैन समता वाहिनी के अनुसार “वह एकमात्र स्थापन जो खुदाई मे मिलेगा, 6 ठीं शताब्दी का एक जैन मंदिर है|” इस संस्था के सचिव सोहन मेहता के अनुसार नष्ट किया गया विवादित ढाँचा वस्तुत: एक प्राचीन जैन मन्दिर के अवशेषों पर बना था, और इस बात को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की गयी खुदाई भी सिद्ध करती है| अयोध्या वह स्थान है जहाँ पर पाँच जैन तीर्थकर ऋषभदेव, अजीतनाथ, अभिनन्दनजी, सुमतिनाथ, और अनन्तनाथ रहे थे| 18वीं सदी के जैन धर्म के लेखो के आधार मेहता कहते है कि यह प्राचीन नगर आज से 450 वर्ष पहले जैन और बौद्ध धर्म के पाँच सबसे बड़े केन्द्रो मे से एक था| मेहता कहते है कि इस स्थान को जैन समुदाय को दे देना चाहिए|

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विवाद -

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1853 मे पहली बार इस स्थल के पास सांप्रदायिक दंगे हुए|

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1859 में ब्रितानी शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी| District Gazetteer Faizabad 1905 के अनुसार ” इस समय (1855) तक हिन्दू और मुस्लिम दोनो ही एक ही भवन में प्रार्थना करते थे| लेकिन 1857 के क्रान्ति के बाद मस्ज़िद के आगे एक बाड़ लगा दी गयी और हिन्दुओ को भीतरी भाग मे जाने से मना कर दिया गया और एक चबूतरा दिया गया|”

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1883 मे कुछ हिन्दू इस चबूतरे पर एक मन्दिर का निर्माण करना चाहते थे लेकिन तत्कालीन उप-मण्डल अधिकारी ने 19 जनवरी 1885 को इस पर रोक लगा दी| महन्त रघुबीर दास ने फैज़ाबाद के उप-न्यायालय मे एक मुकदमा दायर किया| पण्डित हरिकिशन ने चबूतरे पर 17ft X 21ft का एक मन्दिर बनाने के लिये फ़ैज़ाबाद के जिला न्यायाधीश Colonel J.E.A. Chambiar के समक्ष एक अपील दायर की जिसे कि उन्होने 17 मार्च 1886 को स्थान की जाँच के बाद खारिज कर दिया| 25 मई 1886 को पुनः एक अपील अवध के न्याय आयुक्त W. Young के समक्ष की गयी, जिसे भी खारिज कर दिया| इस प्रकार कानूनी लड़ाई का पहला चरण हिन्दू हार गये|

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1934 के साम्प्रदायिक दंगों के समय मस्ज़िद के चारो ओर की दीवार और इसका एक गुम्बद क्षतिग्रस्त हो गया जिसे ब्रिटिश सरकार ने पुन: बना दिया था|

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23 दिसंबर 1949 को जब सवेरे बाबरी मस्जिद का दरवाज़ा खोलने पर पाया गया कि उसके भीतर हिंदुओं के आराध्य देव राम के बाल रूप की मूर्ति रखी थी| अगली सुबह एक कांस्टेबल माता प्रसाद ने इस घटना की रिपोर्ट की तथा यह अयोध्या पुलिस स्टेशन मे दर्ज हुई थी| इस जगह हिंदुओं के आराध्य राम की जन्मभूमि होने का दावा करने वाले हिंदू कट्टरपंथियों ने कहा था कि “रामलला यहाँ प्रकट हुए हैं|” लेकिन मुसलमानों का आरोप है कि रात में किसी ने चुपचाप बाबरी मस्जिद में घुसकर ये मूर्ति वहां रख दी थी| 22 दिसम्बर 1949 की आधी रात को जब पुलिस के सिपाही सो रहे थे, राम और सीता की मूर्तियों को मस्ज़िद मे लाकर रख दिया गया था| फ़ैज़ाबाद के तत्कालीन ज़िलाधिकारी केके नैयर ने घटना की जो रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी उसमें लिखा था, “रात में जब मस्जिद में कोई नहीं था तब कुछ हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद में घुसकर वहाँ एक मूर्ति रख दी|”

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अगली सुबह को हिन्दुओ के बड़े समूह ने मस्ज़िद मे पूजा के लिये जबरदस्ती घुसने का प्रयास किया था| जिला अधिकारी के.के. नैयर ने लिखा है “The crowd made a most determined attempt to force entry. The lock was broken and policemen were rushed off their feet. All of us, officers and men, somehow pushed the crowd back and held the gate. The sadhus recklessly hurled themselves against men and arms and it was with great difficulty that we managed to hold the gate. The gate was secured and locked with a powerful lock brought from outside and police force was strengthened (5:00 pm).”

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मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया| पाँच जनवरी 1950 को जिलाधिकारी ने सांप्रदायिक तनाव की आशंका से बाबरी मस्जिद को विवादित इमारत घोषित कर दिया और उस पर ताला लगाकर इसे सरकारी कब्ज़े में ले लिया|

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16 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद ने फैज़ाबाद की ज़िला अदालत में अर्ज़ी दी कि हिंदुओं को उनके भगवान के दर्शन और पूजा का अधिकार दिया जाए| दिगंबर अखाड़ा के महंत और इस वक्त राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष परमहंस रामचंद्र दास ने भी ऐसी ही एक अर्ज़ी दी|  19 जनवरी 1950 को फ़ैजाबाद के सिविल जज ने इन दोनों अर्ज़ियों पर एक साथ सुनवाई की और मूर्तियां हटाने की कोशिशों पर रोक लगाने के साथ साथ इन मूर्तियों के रखरखाव और हिंदुओं को बंद दरवाज़े के बाहर से ही इन मूर्तियों के दर्शन करने की इजाज़त दे दी| साथ ही, अदालत ने मुसलमानों पर पाबंदी लगा दी कि वे इस ‘विवादित मस्जिद’ के तीन सौ मीटर के दायरे में न आएँ|

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1984 मे कुछ हिंदुओं ने विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में भगवान राम के जन्म स्थल को “मुक्त” करने और वहाँ राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया| बाद में इस अभियान का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के एक प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया|

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एक याचिका पर फ़ैज़ाबाद के ज़िला जज के एम पांडे ने एक फ़रवरी 1986 को विवादित मस्जिद के ताले खोलने का आदेश दिया और हिंदुओं को उसके भीतर जाकर पूजा करने की इजाज़त दे दी| मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया|

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3006_mosque11 नवंबर 1986 को विश्व हिंदू परिषद ने विवादित मस्जिद के पास की ज़मीन पर गड्ढे खोदकर शिला पूजन किया| 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज़ किया और विवादित स्थल के नज़दीक राम मंदिर की नींव रखी| 10 नवंबर 1989 को अयोध्या में मंदिर का शिलान्यास हुआ| लेकिन अगले ही दिन फ़ैज़ाबाद के ज़िलाधीश ने आगे निर्माण पर रोक लगा दी|

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1990 में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को कुछ नुक़सान पहुँचाया| तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वार्ता के ज़रिए विवाद सुलझाने के प्रयास किए मगर अगले वर्ष वार्ताएँ विफल हो गईं|

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1992 में विश्व हिंदू परिषद, शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया| इसके परिणामस्वरूप देश भर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे जिसमें 2000 से ज़्यादा लोग मारे गए|

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट -

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अप्रैल 2003 मे इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की, जून महीने तक खुदाई चलने के बाद रिपोर्ट आई | इसकी रिपोर्ट मे यहाँ मस्ज़िद के नीचे एक मन्दिर के होने के निश्चित संकेत मिलते हैं| भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के शब्दो मे कहें तो उन्होने यहाँ “distinctive features associated with… temples of north India” खोजा| खुदाई से पता चला है कि- “stone and decorated bricks as well as mutilated sculpture of a divine couple and carved architectural features, including foliage patterns, amalaka, kapotapali, doorjamb with semi-circular shrine pilaster, broke octagonal shaft of black schist pillar, lotus motif, circular shrine having pranjala (watershute) in the north and 50 pillar bases in association with a huge structure”

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मुस्लिम इस रिपोर्ट की आलोचना करते हैं और इसे पूर्वाग्रहों पर आधारित मानते है| वहीं दूसरी ओर विहिप और स्वयंसेवक संघ इस रिपोर्ट को आधार मान कर इस स्थल को हिन्दुओं को सौंपने की वकालत करते है|

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यह विवाद सुलझने के बजाय हर बार बढ़ता ही गया| अभी तक ऐसा कोई भी हल नही मिला जो सभी पक्षों को स्वीकार्य हो| हालांकि 30 जून 2009 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जाँच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंप दी है, इस रिपोर्ट पर हो रही विकृत राजनीति को देखते हुये लगता कि अभी भी देश को इस मुद्दे से छुटकारा नही मिलेगा|

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Reference:

http://en.wikipedia.org/wiki/Babri_Mosque

http://www.rediff.com/news/2003/aug/25ayo1.htm

http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/1844930.stm

http://www.bbc.co.uk/hindi/news/story/2007/03/070322_babri_cort_cases.shtml

http://mail.sarai.net/pipermail/deewan/2007-October/000832.html

http://www.expressindia.com/news/fullstory.php?newsid=19686

http://www.britannica.com/EBchecked/topic/47510/Babri-Mosjid

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